डॉग लवर्स का सरकार और कोर्ट से सीधा सवाल — आखिर कहाँ जाएंगे 10 लाख बेसहारा कुत्ते?

Share this post on:

डॉग लवर्स का सरकार और कोर्ट से सीधा सवाल — आखिर कहाँ जाएंगे 10 लाख बेसहारा कुत्ते?

अगस्त की तेज बारिश के बीच सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली के आवारा कुत्तों को लेकर आया अचानक फैसला सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। X से लेकर इंस्टाग्राम तक इस पर बहस तेज हो गई है। आइए, पूरा मामला विस्तार से जानते हैं—

दरअसल, सोमवार (11 अगस्त) को जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस महादेवन की बेंच ने नगर निगम के सभी आला अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए कि दिल्ली-एनसीआर में फैले हुए सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजा जाए। कोर्ट ने माना कि ये कुत्ते आम लोगों, विशेषकर बच्चों और महिलाओं के लिए खतरा बने हुए हैं। आवारा कुत्तों के काटने से हो रहे रेबीज़ और मौत के मामलों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया गया।

मुद्दा सोशल मीडिया में वायरल होते ही “डॉग लवर्स” ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है — “दस लाख से ज्यादा आवारा कुत्तों को सरकार कहाँ रखेगी? उनकी सुरक्षा और देखभाल की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?” बताते चलें कि वर्तमान में इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर सुविधा मौजूद नहीं है।

गुरुवार को, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय बेंच — जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. — ने की। कुत्तों के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और इनके खिलाफ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलीलें पेश कीं। बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

सरकार की ओर से पेश तुषार मेहता ने एक वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि नसबंदी होने के बावजूद रेबीज़ के मामले थमे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि आवारा कुत्ते खासकर छोटे बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं और भारत में हर साल करीब “37 लाख” कुत्ते के काटने की घटनाएं दर्ज होती हैं (WHO के अनुसार, वास्तविक आंकड़े कुछ अलग हो सकते हैं)। उन्होंने साफ कहा — “हम में से कोई जानवरों से नफरत नहीं करता, लेकिन जब जान का सवाल होगा तो कठोर कदम उठाने ही पड़ेंगे।” साथ ही टिप्पणी की — “आज चिकन-मटन डकारने वाले लोग भी खुद को एनिमल लवर बता रहे हैं।”

दूसरी तरफ, कपिल सिब्बल ने कहा कि कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन पर्याप्त शेल्टर नहीं हैं। जहां जगह है भी, वहां भीड़ और तनाव के कारण वे और खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए, ऐसे आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जानी चाहिए।

इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा — “संसद नियम और कानून तो बना देती है, लेकिन उनका पालन होते हुए जमीन पर दिखता नहीं है। एक तरफ इंसान इतने पीड़ित हैं, तो वहीं दूसरी तरफ डॉग लवर्स खड़े हैं। अपनी जिम्मेदारी लीजिए… जिन लोगों ने हस्तक्षेप याचिकाएं दी हैं, उन्हें आगे हलफनामा और सबूत भी पेश करने होंगे।”सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कहा कि कथित डॉग लवर्स विदेशी ब्रीड के कुत्तों को ही “क्यूट” मानते हैं, जबकि देशी कुत्तों को कोई अपने घर में पालना नहीं चाहता है। जब उन्हें पाला ही नहीं जाएगा, तो मजबूरन उन्हें सड़क पर ही भटकना पड़ेगा और दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ेगा.

रिपोर्ट – भास्कर कुकरेती

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *