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राष्ट्रीय मासिक पत्रिका प्रेरणा-अंशु के मई माह का सम्पादकीय

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-वीरेश कुमार सिंह पिछली 15 मार्च को जब हम लोग प्रेरणा-अंशु के वार्षिक समारोह व मास्साब की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी पुस्तक ‘गाँव […]

भारत माता संकट में है और मौज में हैं उसकी जय के नारे लगाने वाले!

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क्या वास्तव में इससे बुरा कुछ हो सकता है? -वीरेश कुमार सिंह  ‘हमारे मोडो को इत्तो मारो है इत्तो मारो है, जे खटिया पे पड़ो […]


कोरोना काल में चर्चा •••

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फाँसी भी चढ़ेंगे और अपनी शवयात्रा भी देखेंगे••• -रूपेश कुमार सिंह  “क्रान्तिकारी की तरह फाँसी भी चढ़ना चाहते हैं और अपनी भव्य शवयात्रा भी देखना […]

कोरोना काम में•••

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-रूपेश कुमार सिंह  (1) एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं, पाँच नहीं कभी-कभी तो सप्ताह भर से ज्यादा भी तुम मुझसे चिपकी रहती […]

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सहजन का जाता हुआ सीजन है। शहरी लोग इसके बारे में कम जानते हैं। जो जानते हैं वो इसे लकड़ी की सब्जी कहते हैं। खाना […]

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सहजन का जाता हुआ सीजन है। शहरी लोग इसके बारे में कम जानते हैं। जो जानते हैं वो इसे लकड़ी की सब्जी कहते हैं। खाना […]

कोरोना काल में रोविंग रिर्पोटिंग- भाग एक

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आठ साल! रूद्रपुर विधानसभा क्षेत्र बदहालकौन है जिम्मेदार! कुछ तो बोलो ‘ठुकराल’ ??? -रूपेश कुमार सिंह लम्बी-चैड़ी कद-काठी, गठीला शरीर, गोरा रंग, आँखों पर रेबन […]

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प्राण की इतनी ही परवाह थी तो राजनीति में काहे आये विधायक जी? परचून की दुकान खोल लिए होते और आराम से सौदा बेचते। न […]

कोरोना काल में रोविंग रिपोर्टिंग… भाग-दो

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आठ साल रुद्रपुर बदहाल… -रूपेश कुमार सिंह चर्चित शायर इरतज़ा निशात ने एक शेर कहा था- ‘‘कुर्सी है तुम्हारा यह जनाजा तो नहीं हैकुछ कर […]