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-रूपेश कुमार सिंह

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किस्से में बदल जाओगे तुम ‘कोरोना’ आने वाली पीढ़ी के लिए किस्सा बनकर दुनिया में जिन्दा रहोगे तुम ‘कोरोना।’ हमने नहीं देखा स्पैनिश फ्लू, प्लेग, […]

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बदचलन!हाँ, मैं बदचलन हूँ उठने-बैठने हँसने-रोने नाचने-गानेलिखने-पढ़नेसोने-जागनेकहने-सुनने खाने-पीनेसोचने-समझनेबोलने-खामोश रहने/औरमेरी हर हरकत में दिखेगा तुम्हेंमेरा बदचलन होनालड़कियों से मिलने-जुलनेसड़क पर चलने-थिरकनेगलतियों पर रोकने-टोकनेइंसानियत के लिए मरने-मिटनेसही के लिए लड़ने-भिड़नेप्रेम के […]

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प्रवासी / महेन्द्र ‘आज़ाद’ जब गांवों से लोग बाहर निकले तो उन्होंने मिलकर बनाएकस्बेनगर और फिरशहर;कुछ लोग शहर बनाने में मशगूल रहेतो कुछ उनमें रहने लगेरहने […]

कोरोना काल से- भाग तीन

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–रूपेश कुमार सिंह  “मुँह पर उंगली उठाकर कड़ी आलोचना करने से आज के स्वयंभू मूर्धन्य साहित्यकारों की गीली-पीली हो जाती है। आज के दौर में […]

समसामयिक-लेख

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-वीरेश कुमार सिंह जबसे प्रधानमंत्री मोदी जी ने टीवी पर आकर राष्ट्र और राष्ट्रवासियों को सम्बोधित करते हुए उनसे आत्मनिर्भर बनने व स्वदेशी अपनाने का […]

कोरोना काल से- भाग चार

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पैदल रिपोर्टिंग-रूपेश कुमार सिंह       भौंकते सिर्फ कुत्ते ही नहीं हैं। दिमाग से पैदल, सोच-समझ शून्य, अंधभक्तों में शुमार चीत्कार करने वाले चिरांद भी […]

कोरोना काल में चर्चा:

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-रूपेश कुमार सिंह       1977 में मैग्सेसे, 1986 में पद्मश्री, 1996 में ज्ञानपीठ, 2006 में पद्मभूषण सहित दर्जनों देशी-विदेशी पुरस्कार प्राप्त करने वाली कालजयी […]

कोरोना काल से- गुफ्तगू/पैदल रिपोर्टिंग 

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-रूपेश कुमार सिंह“शहर रहने लायक बचे नहीं हैं। छोटे कस्बे और गाँव ही मुफ़ीद हैं। काश! हम भी गाँव वापस लौट पाते।” जाने-माने कवि मदन […]

कोरोना काल में- मेरी पोटली से

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-रूपेश कुमार सिंह नेता एकम नेतानेता दूनी धोखेबाजनेता तियां तिकड़मबाजनेता चौके चार सौ बीसनेता पंजे पव्वाफेकनेता छक्के छैलछबीलानेता सत्ते सत्ताधारी नेता अट्ठे अठकलबाजनेता निमां नमक हरामनेता दशम […]